msanglikar

विमानात सीता आणि रामप्रसाद शेजारी-शेजारी बसले होते, तर दुसरीकडे थोड्या अंतरावर हनमंत राव आणि लखनप्रसाद ही जोडी बसली होती.

हनमंत राव लखनप्रसादला म्हणाला, ‘मैं आपको एक टीप देना चाहता हूं’
‘कैसी टीप?’ लखनप्रसादने विचारले.
‘यही की जब गुस्सा आता है तब माइंड कंट्रोल करना चाहिये. लर्न टू कंट्रोल युअर माइंड’, हनमंत राव म्हणाला.
‘हां.... आजकाल मैं हररोज हनुमान चालीसा पढता रहता हूं, माइंड कंट्रोल करने के लिये’
‘उस से क्या होता है? आप इतने पढे लिखे हो, आपको माइंड कंट्रोल के मॉडर्न तरीके अपनाने चाहिये’
‘लेकिन यह मॉडर्न तरीके मुझे सिखायेगा कौन?’
‘गुगल कीजिये, ढेर सारी जानकारी मिल जायेगी आपको... किसी गुरू-बिरू की जरूरत ही नही. सेल्फ स्टडी इज सुप्रिम स्टडी’, हनमंत रावाने सांगितले.

दुसरीकडे सीता नेहमीप्रमाणे रामप्रसादपुढे बडबड करत होती आणि रामप्रसादही नेहमीप्रमाणे ती काय बोलतेय हे न ऐकताच हो हो, नाही नाही अशा अर्थाने मान हलवत होता. हे सीतेच्या लक्षात आल्यावर त्याच्या हातावर चापट मारत ती म्हणाली, ‘क्या सोच रहे हो रामन्ना? कुछ बोलते क्यों नहीं?’

‘रामन्ना?’ रामप्रसादने चमकून विचारले, ‘यह किस नये नाम से पुकार रही हो मुझे तुम?’
‘हम चेन्नई जा रहें हैं ना, वहां रामप्रसाद को रामन्ना बोलते है, इसिलिये मैं ने तुम्हे इस नाम से पुकारा’ सीतेने उत्तर दिले.
‘अच्छा, यह बात है... फिर तो जब हम चेन्नई से पूना के लिये रवाना होंगे तब तुम मुझे रामभाऊ कहने लगोगी...’ रामप्रसाद म्हणाला.
‘नहीं..’ सीता म्हणाली, ‘रामभाऊ का मतलब रामू भैय्या होता है. वहां तो मैं तुम्हे सिर्फ रामू कह कर पुकारुंगी’
‘तो मैं क्या तुम्हारा नौकर हूं?’ रामप्रसाद डोळे वटारत म्हणाला.
‘मैं ने ऐसा तो नहीं कहा...’ सीता हसत म्हणाली. मग तिने विषय बदलला.
‘पूना पहुंचने के बाद हम उर्मिला को वहां बुलायेंगे. बेचारी बोअर हो गयी होगी’
‘ठीक है, लेकीन पहले लखनप्रसाद को पुछना चाहिये’
‘उसीने कहा मुझे. बेचारा वह भी बोअर हो गया है’
‘फिर ठीक है’
मग त्यानेही विषय बदलत विचारले, ‘एक बात मेरी समझ में नहीं आ रही है... यह सब तुमने किया कैसे?’
‘मैं ने क्या किया?’
‘यही... तुमने रावन्ना-2 को चकमा कैसे दिया? कुछ तो गडबड है’
‘मैं फिर कभी बताउंगी’
‘अभी क्यों नहीं?’
‘क्यों कि वह एक सिक्रेट है... फिलहाल राज को राज रहने दो... पूना पहुंचने का बाद मैं डिटेल में पूरी स्टोरी सुना दूंगी’

पुढे वाचा: http://mahaakatha.blogspot.in/2014/08/blog-post_23.html