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नरसिंह जयंती (Narsingh Jayanti )ची माहिती

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मराठी सण / मराठी फेस्टिवल / मराठी फेस्टिवल्स (Marathi San / Marathi Festival / Marathi Festivals) 
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हिरण्यकश्यपू नावाच्या राक्षसाने कठोर तपश्चर्या करून ब्रम्हदेवाकडून मनुष्य, पशु, पक्षी, नाग वगैरे प्राणी किंवा देवता यांचेकडून तसेच घरात किंवा घराबाहेर, दिवसा किंवा रात्री मृत्यू येऊ नये असा विलक्षण वर मिळवला. या वरामुळे हिरण्यकश्यपू उन्मत्त होऊन लोकांना त्रास देऊ लागला. हिरण्यकश्यपूचा मुलगा प्रल्हाद मात्र विष्णूचा भक्त असल्यामुळे त्याचाही हिरण्यकश्यपू अतोनात छळ करू लागला. प्रल्हादाला कड्यावरून ढकलून दिले, उकळत्या तेलाच्या कढईत टाकले पण भगवान विष्णुने आपल्या भक्ताचे रक्षण केले.

एक दिवस हिरण्यकश्यपूने कुचेष्टेने या खांबामध्ये तुझा विष्णू आहे का म्हणून विचारले. प्रल्हादाने हो म्हटल्याबरोबर हिरण्यकश्यपूने त्या खांबास लाथ मारली. खांब मोडून त्यातून भगवान विष्णू नरसिंह रूपात प्रकट झाले.

ब्रम्हदेवाने हिरण्यकश्यपूला दिलेल्या वरातून अचूक पळवाट काढून भगवान विष्णूंनी नर-सिंहाच्या रूपात दिवस रात्रीच्या संधीकाळात, दरवाज्यात हिरण्यकश्यपूचा वध केला व त्यामुळे सर्वत्र आनंदी आनंद झाला. या दिवशी नरसिंहाची पूजा करून उपवास करतात. रात्री कथा श्रवण करतात.

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