Author Topic: क्षितीज रुंद होत आहे - Kshitij rund hot aahe  (Read 1710 times)

Manasi

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मराठी कविता - मराठी प्रेम  कविता (Marathi kavita / Marathi prem Kavita )
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क्षितीज रुंद होत आहे

क्षितीज रुंद होत आहे
आज माझ्या वेदनेला
अर्थ नवा येत आहे
आणि मेघांच्या डफावर
थाप बिजली देत आहे
आज मरण आपुल्याच
मरणाला भीत आहे
आणि मृत्युंजयी आत्मा
पुन्हा धडक देत आहे
आज शुष्क फांद्यावर
बहर नवा येत आहे
भूमीच्या गर्भामधुनी
बीज हुंकार देत आहे
आज सारे गगन थिटे
नजरेला येत आहे
काळोखाच्या तबकडीत
सूर्य गजर देत आहे
आज तडकलेले मन
एकसंध होत आहे
आणि उसवलेले धागे
गुंफूनीया देत आहे
आज माझ्या कोरड्या गा
शब्दात आग येत आहे
आणि नव्या सृजनाचे
क्षितीज रुंद होत आहे.

कवी - नारायण सुर्वे

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